भक्त Vs चमचा

इस वक्त भारत देश राजनीतिक तौर पर पर दो हिस्सों में बँटा हुआ है. एक है भक्तों की टोली और दूसरा चमचों का ग्रुप. दोनों ही खतरनाक है. और हाँ ये क्लासिफिकेशन करने वाला और कोई नहीं, ये है- सोशल मीडिया पर आपके विचार व आपकी विचारधारा.

हमें सबसे पहले इन दोनों प्रजातियों की परिभाषा समझना जरूरी है.
भक्त वो होते हैं जो मोदी जी को फॉलो करते हैं. इसका मतलब है कि ये लोग मोदी जी को ही फॉलो करते हैं, किसी विचारधारा, पार्टी, बंदे या किसी और चीज से इनको घंटा कोई लेना देना नहीं है. और हाँ..भक्त बनने के लिए आपको किसी लॉजिक की जरूरत बिल्कुल नहीं होती, बस आपको मोदी-भक्ति करनी होती है अर्थात अंध भक्ति.

हाँ, आजकल के माहौल में आप सुरक्षित महसूस करेंगे अगर आप दिल से भक्त हैं तो…

दूसरी प्रजाति है, चमचे. एक समय में चमचों का खूब वर्चस्व हुआ करता था. लेकिन आजकल जब से कांग्रेस की हालत एक स्थानीय पार्टी से भी गई-गुजरी हो चुकी है, तब से बेचारे चमचे भी कुछ खास सामने नहीं आ पा रहे. तो आप समझ ही गए होंगे कि चमचा उन्हें कहा जाता है जो आज के दौर में भी कांग्रेस का साथ देते हैं, चाहे वो समझ आए या ना आए. ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि चमचों के आका की ज्यादातर बातें समझ आती ही नहीं. आजकल आप ट्रोलिंग के शिकार हो सकते हैं अगर आप एक चमचे हैं तो…

लेकिन बनें तो बनें क्या? भक्त या चमचा?
आपको ये सब पढ़ के गुस्सा आ सकता है. लेकिन सच्ची बात है कि ये सारा वर्गीकरण बिल्कुल निर्थरक, बकवास एवं निराधार हैं. ऐसी बरगलाने वाली बातें नेताओं और कुछ कट्टरपंथी जाहिलों द्वारा पैदा की जाती हैं. फिर यही बातें हम लोगों को राजनीतिक तौर पर खोखला एवं कमजोर बनाने के काम आती हैं. कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जो खुद को गर्व से भक्त या चमचा कहने में संकोच नहीं करते. ये वही लोग हैं जिनकी खुद की पहचान नहीं है और इन शब्दों के इस्तेमाल से चमकने की कोशिश करते हैं.

अगर आप इन बातों को समझ पा रहे हैं तो इतना तो स्पष्ट है कि आप राजनीति की अच्छी समझ रखते हैं. इस समझ को आप अगर सकारात्मक तरीके से इस्तेमाल में लाएं तो बड़ा कुछ हासिल कर सकते हैं और देश को तरक्की की ओर ले जाने में योगदान दे सकते हैं. इस दौर में हमें भक्त और चमचों के ग्रुप में बंटने की नहीं बल्कि सोच समझकर सही को सही और गलत को गलत कहने की जरूरत है.

क्यों गलत है भक्त बनाम चमचों की लड़ाई?
ये लड़ाई इसलिए गलत है क्योंकि इस से हमने खुद को एक खास विचारधारा के सीमित दायरे में कैद कर लिया है. अगर आपने खुद को भक्त स्वीकार कर लिया तो आपके पास बीजेपी और मोदी जी को सपोर्ट करने के अलावा कोई ऑप्शन ही नहीं रह जाता. आप अपनी अंतर आत्मा को मार कर भी आँखें बंद कर के उस व्यक्ति की बात को सही मानते हो.

और अगर आप किसी के गलत काम अथवा झूठ को भी तर्क देकर जस्टिफाई करने की कोशिश करते हैं तो आप तर्क नहीं कुतर्क कर रहे हो मेरे दोस्त!

कमाल की बात ये है कि आप फिर चमचों से या लिबरल गैंग के लोगों से बात करना भी पसंद नहीं करते. आप उन्हें बेवजह दुश्मन मान बैठे हैं. जानी दुश्मन. असल में उनसे आपका वास्तव में लेना देना कुछ भी नहीं होता. हो सकता है कि वो आपसे बुद्धिमान हो, पर आपकी भक्ति या चमचागिरी के आगे आप एक दूसरे को नफरत करना शुरु कर देते हैं.

अगर आपके सामने कोई बीजेपी की विचारधारा के साथ सहमति न जताए तो आप उसको भी सीधे चमचों की कैटेगरी में डाल देते हैं. हो सकता है कि सच में सामने वाला किसी वैलिड पॉइन्ट के साथ बात कर रहा हो लेकिन खुद को चमचा कहलाने के बाद वो आपसे बात करना बिल्कुल पसंद नहीं करेगा.

इसी तरह अगर कोई मोदी जी के काम की तारीफ करे या जरा भी बीजेपी या हिंदुत्व के बारे में कुछ कहे तो उसको सीधे भक्त करार दे दिया जाता है. अब ऐसा नहीं है कि 6 सालों में मोदी जी ने एक भी काम न किया हो, अगर किया है तो इसका क्रेडिट उन्हें दिया जाना जरूरी है. मोदी के किसी एक काम का समर्थन करने का मतलब भक्त होना नहीं है.

कैसे खतम होगी ये लड़ाई?
इसी तरह कांग्रेस ने 70 सालों में कुछ नहीं किया, ऐसा कहने वाले भी गधे से कम नहीं हैं. मेरे भाई आप जिस स्कूल या कॉलेज से पढ़े हैं, जो भी आप आस-पास देखते हैं, या जिन चीजों की वजह से आप हिंदुस्तानी होने पर गर्व करते हैं, वो कांग्रेस के टाइम में ही हुआ है. तो कांग्रेसी की हर बात को चमचा कह कर टाल देने के लिए आपको बुद्धिमान नहीं बल्कि चूतिया कहा जाना चाहिए.

ये भक्त और चमचा कहने की सारी गतिविधि हमारी बातचीत में बाधा बनती है और इस बाधा के साथ राजनीतिक परिपक्वता आना असंभव है. इस लड़ाई से पूरा देश दो गुटों में बंट रहा है. इसी बँटवारे का फायदा उठा रही है राजनीतिक पार्टियाँ. आजकल एक-एक सीट जरूरी है. बीजेपी वाले सरकार बनाकर खुश हैं और कांग्रेस के कुछ नेता अपनी सीट जीत कर.

भक्तों और चमचों को हकीकत में सिवाय सोशल मीडिया पर बकवासबाजी और वर्चुअल फ्रस्टेशन के अलावा और कुछ नहीं मिल रहा.

मेरी मुफ्त में यही सलाह है कि अपने सोच और ज्ञान के दायरे को निरंतर बढ़ाते रहिए क्योंकि एक सकारात्मक सोच और ढेर सारा ज्ञान ही आपको दूसरों से अलग बनाता है. इस भक्ति और चमचागिरी की क्लासिफिकेशन से दूर रहिए. गर्व से कहिए कि हम एक नागरिक हैं, सही को सही और गलत को गलत कहते हैं.

हाँ, इससे पहले कि कोई आपको भक्त या चमचे की कैटेगरी में डाले, उससे पहले आप उसको चूतिए की कैटेगरी में डाल दीजिए.

धन्यवाद!

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